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जनआन्दोलन से ही व्यवस्था परिवर्तन एवं प्रतिरोध की क्षमता उत्पन्न होगी-! आज देश में गरीबी, भुखमरी, अनियंत्रित व्यवस्था  आम हो गयी है | एक तरफ लोग दिन प्रतिदिन आमिर होते जा रहे हैं तो दूसरी और गरीबी भी सुरषा के मुंह की तरह फैलती जा रही है, और पता नहीं कितना फैलेगी | एक तरफ अनाज बर्बाद हो रहा है, दूसरी तरफ लोग दाने-दाने को मोहताज़ हैं| एक तरफ हम विश्व मंच से अपने विकसित होने की बात करते फिर रहे हैं तो दूसरी और लोग एक दूसरे को देख कर आंहे भरते नजर आ रहे हैं | इस देश का ही एक भाग लगातार बेवजह सुलग रहा है और सरकार सिर्फ दिलासा देती फिर रही है | सरकार को लगातार आंतरिक ताकतों द्वारा चुनौती मिल रही है और सरकार सिर्फ घोषणा और बयान देकर अपना काम पूरा कर रही है | आज बेरोजगारी की स्थिति और भी भयावह होती जा रही है ,लेकिन यहाँ भी सिर्फ आश्वाशन ही मिलता दिख रहा है | अब जो सबसे बड़ी बात है वो यह क्या की इतना कुछ होने के बाद भी हम चुप क्यूँ हैं | तो इसका सीधा सा एक ही जवाब है की कोई आगे आने की हिम्मत नहीं कर रहा है | एक बात तो तय है की कोईइतना तो तय है की कोई न कोई तो आगे आएगा ही | लेकिन सबसे बड़ी बात जो है वो ये क्या की आज का युवा वर्ग सिर्फ अपने तक ही सीमित होकर रह गया है | उसे देश दुनिया से ज्यादा कुछ लेना देना नहीं रह गया है| यह स्थिति देश के लिए खतरनाक है | हाल में मैंने अपने तीन चार मित्रों से कहा की हमलोगों को देश के लिए कुछ करना चाहिए तो वो सोचने वाली स्थिति में आ गए | और सबसे जो सबसे बड़ी बात है वो ये क्या की उनमे से ज्यादातर ने कहा क इतुम तो राजनीती के कीड़े हो तो बनो , हमलोगों के भी कुछ कल्याण कर देना| मुझे बड़ा ही ताज्जुब हुआ , और खुद पर शर्म भी आयी की पढ़े लिखे लोग ऐसा सोच सकते हैं तो औरों की तो बात ही कुछ और है | लेकिन मेरा भरोसा है की एक दिन वही लोग आयेंगे और कहेंगे की हम भी कुछ करना चाहते हैं | मेरी शिकायत है की आखिर क्या हम इतने बेफिक्र हो गए हैं की अपने में ही चूर रहते हैं | दुःख तो होता ही है लेकिन एक पल यह भी सोचता हूँ की सही ही तो कर रहे हैं | लेकिन दूसरे पल गुस्सा भी आता है जब वो कहते हैं की राजनीत देश को बर्बाद करके ही दम लेगी | अरे भाई जब आप गली देते हो तो उसे सुधारने की कोशिश तो करो , वो आपसे होगा नहीं तो आप लाया खी नहीं हो उस विषय में कुछ कहने को | मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ की आज जो स्थिति बन रही है वो आज न कल एक आन्दोलन का रूप लेने वाली है | जनता का खून कभी तो गरम होगा , लोग कभी तो कुछ देश के बारे में सोचेंगे | और युवा वर्ग कभी तो अपने अधिकार के लिए आगे आएगा | सब परिस्थिति पनप रही है बस अब चिंगारी फूटनी बांकी है | आग तो अक्ब की लग चूकी है और बहुत से लोग ऐसा हैं जो झुलसने वाले हैं | अब फिर से एक आपातकाल की जरूरत भी आ सकती है जब देश के लोग एकजुट हों और एक करार जवाब दें |
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